बोरतरा में 4.1 करोड़ का उच्च स्तरीय पुलमय पहुंच मार्ग निर्माण अपूर्ण, बनीं ग्रामीणों की मुसीबत

अनदेखी : निर्माण के निर्धारित समय 13/08/2026 की समय सीमा के 02 माह बाद भी अधूरा 

समस्या - पुल के अपूर्ण निर्माण के चलते सितंबर की बरसात में हुआ था मार्ग बंद, उठानी पड़ी थी परेशानी 

मामला - साजा के बोरतरा मासूलगोंदी मार्ग पर बोरतरा में कर्रा नाला पर उच्च स्तरीय पुलमय पहुंच मार्ग का निर्माण 
 
विडंबना - जिलें में नहीं हैं सेतु विभाग pwd का कार्यालय व अधिकारी, सभी निर्माण कार्य आउट ऑफ डेट 
बेमेतरा 14 अक्टूबर 2026 - बेमेतरा जिले के साजा विधानसभा अंतर्गत पीडब्ल्यूडी सेतु विभाग का एक और समय सीमा का मामला सामने आया है। जहां कर्रा नाला पर उच्च स्तरीय पुल और पहुँच मार्ग का निर्माण किया जा रहा हैं। 13/08/2026 को पूर्ण हो जाना था, लेकिन समय सीमा के बाद भी अब तक 02 माह बीतने को हैं। मगर पुल निर्माण कार्य अब तक अपूर्ण हैं। पुल के अपूर्ण निर्माण कार्य से राहगीरों व क्षेत्रवासियों को आवागमन में परेशानियों व दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैं। 

बोरतरा के कर्रा नाला पर उच्च स्तरीय पुल का निर्माण  
बेमेतरा जिले के साजा विधानसभा अंतर्गत ग्राम बोरतरा में मासूलगोंदी परपोड़ी मार्ग पर कर्रा नाला पर बन रहा उच्च स्तरीय पुल और पहुँच मार्ग का निर्माण किया जा रहा हैं। जिसके निर्माण के लिए शासन द्वारा 409.71 लाख की स्वीकृति की गई थी। जिसके निर्माण कार्य के लिए ठेकेदार को कार्यादेश 14/07/2025 को जारी कर 13/08/2026 का समय सीमा निर्धारित किया गया था। मगर अब समय सीमा को खत्म हुए भी 2 महीने बीत जाने के बाद भी पूरा नहीं हो सका है, जबकि इसे पूर्ण करने की समय सीमा 13/08/2026 निर्धारित की गई थी। 
योजना और वित्तीय स्थिति 
प्रशासनिक स्वीकृति : 409.71 लाख 
अनुबंध की राशि : 319.77 लाख  
कार्यादेश एवं अनुबंध समय : कार्यादेश 14/07/2025 को जारी किया गया था और अनुबंध के अनुसार कार्य पूरा करने की अवधि 13/08/2026 तय की गई थी। 

सितंबर की बरसात में हुआ था मार्ग बंद 
सितंबर माह में हुई भारी बारिश में आवागमन अवरुद्ध हो गया था। जिसका कारण इस अधूरे पुल निर्माण था, क्योंकि इस पुल निर्माण कार्य में आवागमन के लिए साइड से अप्रोच रोड़ बनाया गया हैं, जो कि बरसात की बाढ़ की पानी आ जाने से आवागमन अवरुद्ध हो गया था। बीजा से परपोड़ी अभी वर्तमान में ही नई सड़क मार्ग का निर्माण हुआ हैं, जो कि बीजा से बोरतरा, मासूलगोंदी होते हुए परपोड़ी जाती हैं। इसी मार्ग पर बोरतरा मासूलगोंदी मार्ग के मध्य ही इस 4 करोड़ के पुल का निर्माण किया जा रहा हैं, जिसके अधूरे निर्माण कार्य के चलते ग्रामीणों को भारी समस्या व परेशानी का सामना करना पड़ रहा हैं। 

जिलें में कार्यालय व अधिकारी लापता 
जिले में सेतु निर्माण विभाग (PWD Bridge Division) का न तो कोई स्थाई कार्यालय है और न ही जिम्मेदार अधिकारी बेमेतरा में बैठते हैं। जानकारी के अनुसार विभाग का डिवीजन ऑफिस दुर्ग एवं सब डिविजन ऑफिस कवर्धा से संचालित होती हैं। विभागीय अनदेखी के कारण ठेकेदार द्वारा कार्य में घोर लापरवाही बरती जा रही है, जिससे शासन की मंशा और जन-सुविधा के उद्देश्यों को झटका लग रहा है। 
परियोजना का तकनीकी विवरण 
पुल की लंबाई : 105 मीटर (04 लगातार स्पॉन @ 26.25 मी + 2 अबटमेंट@ 7मी) 
पुल की चौड़ाई : 8.40 मी 
पहुँच मार्ग की लंबाई : मासूलगोंदी की ओर 88 मीटर एवं बोरतरा की ओर 103 मीटर, कुल 191 मीटर 

समीक्षा व टीएल बैठक का क्या औचित्य 
जिला प्रशासन की समय सीमा और समीक्षा बैठकों के दावों की पोल खोलता एक और नया मामला सामने आया। पीडब्ल्यूडी सेतु विभाग के खम्हरिया डी में उच्च स्तरीय पुलमय पहुंच मार्ग अपने समय सीमा के बाद भी अब तक अपूर्ण हैं। ऐसे में प्रशासन की समीक्षा बैठक व टीएल बैठक का क्या ही औचित्य रह जाता हैं। 
सामान कीचड़ व पानी में पड़े हो रहें खराब 
इस पुल निर्माण कार्य के लिए ठेकेदार द्वारा लाए गए सामान छड़ आदि ऐसे ही खुले, कीचड़ व पानी में पड़े हुए हैं जो खराब हो रहे हैं और इसी खराब समानों का उपयोग इस पुल निर्माण कार्य में किया जाएगा। जिससे निर्माण कार्य में गुणवत्ता को देखने वाला कोई नहीं हैं। 

सुविधा बनीं समस्या व मुसीबत 
इस उच्च स्तरीय पुलमय पहुंच मार्ग को बारिश के पूर्व पूर्ण हो जाना था, मगर अब तक की स्थिति में अपूर्ण हैं। जिससे विभाग व ठेकेदार द्वारा सरकार की मंशा को पलीता लगाया जा रहा हैं। सुविधा के जिस उद्देश्य को लेकर सरकार द्वारा स्वीकृति दी गई वह जमीनी स्तर पर लोगों के लिए उल्टे समस्या व मुसीबत बन गई हैं। बरसात में राहगीरों व क्षेत्रवासियों को इस मुसीबत का सामना रोज करना पड़ रहा हैं।

परेशानी, आक्रोश, सवाल 
समय सीमा बीत जाने के बाद भी कार्य पूरा न होने से स्थानीय ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिसके चलते ग्रामीणों में विभाग व ठेकेदार के प्रति भारी आक्रोश व्याप्त हैं। वहीं जिले में सेतु विभाग के अधिकारियों की अनुपस्थिति से इस परियोजना की निगरानी व गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। 

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