मुक्तिधाम जाने वाली जर्जर सड़क पर शव रख ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन

4 घंटे के प्रशासनिक मान-मनौव्वल के बाद हुआ शव का अंतिम संस्कार 

थान खम्हरिया तहसील के ग्राम बेलतरा का मामला 
बेमेतरा 21 अगस्त 2026 - मौत के बाद भी सम्मानजनक अंतिम विदाई न मिले तो आक्रोश स्वाभाविक है। मामला हैं बेमेतरा जिलें के थान खम्हरिया तहसील क्षेत्र के ग्राम बेलतरा में शुक्रवार को ऐसी ही स्थिति निर्मित हो गई। गांव के दो ग्रामीणों की मौत के बाद जब शव को मुक्तिधाम ले जाने का समय आया तो दलदल भरी जर्जर सड़क आड़े आ गई। आक्रोशित ग्रामीणों ने शव को सड़क पर रखकर जमकर प्रदर्शन किया और सड़क निर्माण की मांग की। 

तहसीलदार व थाना प्रभारी ने संभाला मोर्चा 
स्थिति को नियंत्रित करने तहसीलदार आशुतोष गुप्ता और थाना प्रभारी सत्यप्रकाश उपाध्याय दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। करीब 4 घंटे तक चले मान-मनौव्वल के बाद प्रशासनिक आश्वासन पर ग्रामीण माने तब जाकर शवों का अंतिम संस्कार किया जा सका। 
दलदल में फंसी अर्थी और फूटा परिजनो व ग्रामीणों का गुस्सा 
ग्राम बेलतरा में सुबह दो ग्रामीणों एक पुरूष व एक महिला का निधन हो गया था। परंपरा अनुसार शव को गांव से लगे मुक्तिधाम ले जाया जाना था। लेकिन मुक्तिधाम तक जाने वाली एकमात्र कच्ची सड़क बारिश के कारण पूरी तरह दलदल में तब्दील हो चुकी थी। कीचड़ और गड्ढों के कारण अर्थी को ले जाना संभव नहीं था। इससे नाराज ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने दोनों शवों को सड़क पर रख दिया और "सड़क नहीं तो अंतिम संस्कार नहीं" के नारे लगाते हुए जमकर प्रदर्शन कर दिया। 

6 माह से मांग, ध्यान ना देने का आरोप 
ग्रामीणों का कहना था कि पिछले 6 महिने से कलेक्टर व एसडीएम से सड़क निर्माण की मांग की जाती रही हैं लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। 
         गौरतलब है कि ग्राम बेलतरा के ग्रामीण मुक्तिधाम जाने वाली जर्जर मार्ग से परेशान है पिछले महिने भी एक ग्रामीण के मौत के बाद इसी तरह के हालात निर्मित हुआ था, आज पुनः बेलतरा मे ग्रामीणो का प्रशासन के खिलाफ गुस्सा फूट पड़ा। 

ग्रामीण व जन प्रतिनिधि का दर्द 
सरपंच प्रतिनिधि मुकेश टण्डन ने कहा "जब जिंदा रहते सुविधाएं नहीं मिलती, चलो ठीक है, लेकिन मरने के बाद भी अपनों को कंधा देकर मुक्तिधाम तक न ले जा पाएं, इससे बड़ी शर्म की बात क्या होगी कई बार प्रशासनिक अधिकारीयो को अवगत कराया गया मगर समाधान नही हुआ। मृतक महिला के पोता रौशन मण्डावी ने कहा कि दादी की अंतिम संस्कार हेतु मुक्तिधाम ले जाना बड़ी मुश्किल होती है, आज दुखद पहलू है कि शव रखकर प्रदर्शन करना पड़ रहा है। ग्रामीण कमल साहू व गोवर्धन साहू ने कहा कि 6 माह पूर्व मुक्तिधाम जाने वाली जर्जर मार्ग निर्माण की कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाई व एसडीएम को आवेदन दिया गया था, परंतु जन प्रतिनिधियो व प्रशासन के सुस्त रवैये के चलते सड़क निर्माण नही हो सका जो आज ग्रामीण आक्रोशित हो गये है। 
तहसीलदार व थाना प्रभारी ने ग्रामीणों को समझा किया शांत 
सूचना मिलते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया। थान खम्हरिया तहसीलदार आशुतोष गुप्ता और थाना प्रभारी सत्यप्रकाश उपाध्याय, एएसआई सूरेश चौहान पुलिस बल के साथ गांव पहुंचे। 
  ग्रामीण आक्रोश में थे और किसी की बात मानने को तैयार नहीं थे। तहसीलदार ने ग्रामीणों से चर्चा कर उन्हें समझाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण के लिए प्रस्ताव पहले ही भेजा जा चुका है और जल्द ही स्वीकृति मिल जाएगी। थाना प्रभारी सत्यप्रकाश उपाध्याय ने भी कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील की और शवों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार करने का आग्रह किया। 

4 घंटे बाद टूटा विरोध, तकलीफो भरी सड़कों से गुजर कर किया अंतिम संस्कार 
प्रशासन और ग्रामीणों के बीच करीब 4 घंटे तक बातचीत चलती रही। ग्रामीण लिखित आश्वासन की मांग पर अड़े थे। अंततः तहसीलदार के सड़क निर्माण के आश्वाशन और अपील के बाद ग्रामीण माने और शवों को मुक्तिधाम ले जेकर भारी मन से दोनों शवों का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान पूरे गांव में मातम और आक्रोश दोनों का माहौल था। 

सालों से उपेक्षित है मुक्तिधाम मार्ग विधायक से है बड़ी उम्मीद 
ग्रामीणों के अनुसार बेलतरा का मुक्तिधाम गांव से करीब 1 किमी दूर खेतों के बीच स्थित है। वहां तक जाने के लिए कोई पक्की सड़क नहीं है। बरसात में यह रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है जिससे ग्रामीण काफी परेशान रहते है।ग्राम बेलतरा के ग्रामीणों को वर्तमान विधायक ईश्वर साहू से बड़ी उम्मीदे है, कई बार जनपद और कलेक्टर को आवेदन दिया, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्राम बेलतरा शुरू से प्रशासनीक उपेक्षा का शिकार है। आज की घटना जनप्रतिनिधि व प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दिया है। 

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