मामला लोक निर्माण विभाग नवागढ़ कार्यालय का, जहां दिखी अधिकारियों की उदासीनता व गैरजिम्मेदारी
लापरवाही की हद : सरकारी धन की खुली बर्बादी, अधिकारी अनभिज्ञ
सवाल - 'जब लगवाना नहीं था, तो बनवाया क्यों?'
बेमेतरा 30 जून 2026 - लोक निर्माण विभाग (PWD) नवागढ़ कार्यालय से अधिकारियों की घोर लापरवाही और गैरजिम्मेदारी का एक बड़ा मामला सामने आया है। विकास कार्यों के दावों की पोल खोलती एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसे देखकर क्षेत्र की जनता में भारी आक्रोश है। करोड़ों रुपये के विकास कार्यों की गवाही देने वाले लोकार्पण और भूमिपूजन के चमचमाते 50-60 शिलालेख (पत्थर) आज PWD कार्यालय के खुली आसमान के नीचे कबाड़ में धूल खा रहे हैं।
शासकीय पैसों का ऐसा दुरुपयोग और अधिकारियों की उदासीनता साफ बयां कर रही है कि विभाग को न तो जनता की गाढ़ी कमाई के पैसे की परवाह है और न ही क्षेत्र के विकास से कोई सरोकार।
सालों से पड़े हैं ऐसे ही कबाड़ में
लोकार्पण और भूमिपूजन कार्यों के इन 50-60 शिलालेखो पत्थरों को पीडब्ल्यूडी कार्यालय में खुले आसमान के नीचे पड़े हुए कई वर्षों हो गए हैं। इन शिलालेखों पत्थरों का गौर से निरीक्षण करने पर पाया गया कि यह शिलालेख व पत्थर मुख्यमंत्री व मंत्री के कार्यक्रम के समय के हैं। इन शिलालेखों में दिसंबर 2024 व जनवरी 2025 के समय के कार्यकमों की तारीखें इंगित की गई हैं।
कबाड़ में कैद विकास के 'पत्थर'
नवागढ़ PWD कार्यालय परिसर में खुले आसमान के नीचे एक कोने में कबाड़ के बीच कई दर्जनों ऐसे पत्थर लावारिस हालत में पड़े हुए मिले हैं, जिन पर बकायदा मुख्य अतिथियों, मंत्रियों और स्थानीय जन प्रतिनिधियों के नाम खुदे हुए हैं। ये वो पत्थर हैं जिन्हें बड़े-बड़े आयोजनों में करोड़ों की लागत से बनने वाली सड़कों, भवनों या पुल-पुलियों के भूमिपूजन या लोकार्पण के वक्त शान से अनावरण के लिए तैयार किया गया था। लेकिन आयोजन खत्म होने के बाद, इन पत्थरों को उनके नियत स्थान पर लगाने के बजाय दफ्तर के कबाड़ में लाकर डंप कर दिया गया।
शासकीय राशि का खुला अपव्यय
इन शिलालेखों को तैयार कराने में हजारों-लाखों रुपये की सरकारी राशि खर्च की जाती है। जनता के टैक्स के पैसे का इस तरह दुरुपयोग PWD विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अधिकारियों की इस सुस्ती की वजह से न सिर्फ सरकारी खजाने को चंपत लगी है, बल्कि उन योजनाओं की वर्तमान स्थिति पर भी सस्पेंस बना हुआ है, जिनका ये पत्थर प्रतिनिधित्व करते हैं।
जनता के वो सुलगते सवाल, जिनका जवाब विभाग के पास नहीं :
सवाल 1 : अगर इन पत्थरों को नियत विकास कार्यों के स्थलों पर लगवाना जरूरी नहीं था, तो जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा फूंककर इन्हें बनवाया ही क्यों गया?
सवाल 2 : अगर ये पत्थर बकायदा बजट पास कराकर बनवाए गए, तो निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी इन्हें संबंधित जगहों पर स्थापित क्यों नहीं किया गया?
सवाल 3 : क्या प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ कागजी खानापूर्ति और उद्घाटन की वाहवाही लूटने तक ही सीमित हैं? वहीं PWD के अधिकारी की इतनी भी जिम्मेदारी नहीं कि इसको सुरक्षित स्थान में रखा जाए।
किसी का नहीं इस पर ध्यान
हजारों लाखों रुपए की खर्चे से बने इन शिलालेखो पत्थरों को ऐसे ही कबाड़ में पड़े हुए धूल खाते सालों हो गए हैं, जिस पर विभाग व जिलें के छोटे से लेकर बडे़ अधिकारी कर्मचारी का इस ओर कोई ध्यान ही नहीं हैं। इस तरह की घोर लापरवाही यह साबित करने के लिए काफी है कि नवागढ़ लोक निर्माण विभाग में शासकीय संपत्ति और नियमों का किस कदर मखौल उड़ाया जा रहा है।
अब देखना यह होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद शासन-प्रशासन के उच्च अधिकारी इन गैरजिम्मेदार PWD अफसरों पर क्या कार्रवाई करते हैं, या फिर विकास के ये पत्थर इसी तरह कबाड़ की शोभा बढ़ाते रहेंगे।
"मेरी जानकारी में नहीं हैं, आपके द्वारा बताया जा रहा हैं, उसको पता करवाकर सही स्थानों पर लगवाने या रखने की व्यवस्था करवाता हूं।
---- आरके शर्मा, एसडीओ पीडब्ल्यूडी नवागढ़ "
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