'वट सावित्री' को कहा जाता है वरणदायी व्रत, वट वृक्ष में करते हैं त्रिदेव निवास - पुजारी पं. बोसेन्द्र पांडेय

सुहागिनों ने वट वृक्ष की पूजा कर अखंड सुहाग की मांगी वर 

मटिया (बारगांव) में वट वृक्ष पर रक्षा सूत्र बांधते हुए 108 बार की परिक्रमा 
बेमेतरा 16 मई 2026 - जिलें के बेरला ब्लाक के ग्राम मटिया (बारगांव) में शनिवार को अखंड सुहाग की कामना करते हुए सुहागिनों ने वट वृक्ष की पूजा की। वृक्ष पर रक्षा सूत्र बांधते हुए 108 बार परिक्रमा की। पूजा के दौरान सत्यवान-सावित्री की कथा सुनकर पति की लंबी उम्र और सुखी जीवन की मन्नत मांगी।
   इसके अलावा कोसपातर, बारगांव, बलौदी सहित आसपास गांव के अनेक मोहल्लों में वट वृक्ष के नीचे भक्तिभाव छाया रहा। 
     सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अच्छी सेहत के लिए वट सावित्री का व्रत का बहुत बड़ा महत्व है। मान्यता है कि इसी दिन माता सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और भक्ति से यमराज के हाथों से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस छीन लिए थे, तभी से शादीशुदा महिलाएं अपने सुहाग की रक्षा के लिए हर साल ज्येष्ठ महीने की अमावस्या को यह व्रत रखती हैं। 
     इस बार का वट सावित्री व्रत और भी खास है क्योंकि शनिवार होने की वजह से शनि जयंती और शनिश्चरी अमावस्या का बेहद शुभ संयोग भी है। 
     पुजारी पं. बोसेन्द्र पांडेय के अनुसार 'वट सावित्री' को वरणदायी व्रत कहा जाता है। वट वृक्ष में त्रिदेव निवास करते हैं। वृक्ष के मूल में ब्रह्मा, बीच में विष्णु और अग्र भाग में शिव का निवास होता है। 

दोपहर बाद तपती धूप में की पूजा 
शनिवार को दोपहर बाद पूजा की गई। सोलह श्रृंगार करके महिलाएं तपती धूप में वट वृक्ष की छांव तले पहुंची और विधिवित पूजा-अर्चना की। वृक्ष के चारों ओर परिक्रमा करते हुए हल्दी में डूबे कच्चा सूत को लपेटा और मन्नत मांगी। पूजा करने सास-बहू, ननद-भाभी, देवरानी-जेठानी पहुंची। पड़ोस की अनेक महिलाएं भी ग्रुप में पूजा करने आईं। 
सत्यवान-सावित्री का लिखा नाम 
सुहागिनों ने पत्तलों पर चंदन से मृत्यु के देवता यमराज, भगवान विष्णु और सत्यवान-सावित्री का नाम लिखकर उस पर हल्दी, चंदन, कुमकुम, फूल, नारियल, कच्चा सूत अर्पित किया। चनादाल का भोग लगाया। इसके बाद कथा सुनीं। कुछ महिलाओं ने वृक्ष की 12 बार परिक्रमा की, वहीं कुछ ने 51, 108 बार परिक्रमा कर पति के साथ पूरे परिवार की खुशहाली मांगी और श्रृंगार सामग्री दान भी किया। 

बेसन बड़े का भोग, जनेऊ अर्पण 
पूजा के दौरान तेल में तलकर बनाए गए बेसन के बड़े का भोग और जनेऊ भी अर्पित किया। ज्योति यादव ने बताया कि वट वृक्ष को अर्पित किया गया जनेऊ पति पहनते हैं, यह शुभता का संकेत माना जाता है। 

सावित्री के तप से प्रसन्न होकर पति को किया जीवित 
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार सती सावित्री के पति सत्यवान की मृत्यु हो गई। वट वृक्ष के नीचे शव रखा था। मृत्यु के देवता यमराज जब प्राणवायु लेकर चले तो सावित्री भी उनके पीछे गई। सावित्री के संकल्प से प्रसन्न होकर यमराज ने पति सत्यवान को जीवित किया। ज्येष्ठ अमावस्या तिथि पर पति सत्यवान को पुनर्जीवन मिला। इसी मान्यता के चलते वट वृक्ष के नीचे सुहागिनें पूजा करतीं हैं।