छत्तीसगढ़ संस्कृत शिक्षक संघ के चलाए संस्कृत विषय बचाओ अभियान से शासन के सौहार्द्र पूर्ण व्यवहार से संस्कृत शिक्षकों की सपना हो रही है साकार
संस्कृत विषय बचाओ अभियान को लेकर प्रदेश संघ ने राज्यपाल, सांसदों, विधायको, मंत्रियों, कलेक्टरों, मुख्य सचिवों, सचिवों, संचालकों को सौंपा था मांग पत्र एवं ज्ञापन
रायपुर/बेमेतरा 11 मई 2026 - संस्कृत विषय बचाओ अभियान के तहत छत्तीसगढ़ संस्कृत शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष दौलत राम साहू के नेतृत्व में संघ के पदाधिकारी शिरीष श्रीवास्तव, दीनबंधु पाल, हेमंत कुमार शर्मा, सनद वर्मा, पूरनलाल साहू, तरुण कुमार साहू, नरेश विश्वकर्मा, मनोज वर्मा, ईश्वरी यदु, शारदा साहू, गंगाराम साहू, महेश्वर द्विवेदी, महेश कुमार गढ़वाल, दिनेश ध्रुव, सुनील महार, मनोज वैष्णव सहित छत्तीसगढ़ प्रदेश के पांच शिक्षा संभाग के शिक्षक एवं शिक्षिकाओ द्वारा भारतीय संविधान में सर्वोच्च स्थान प्राप्त आठवीं अनुसूची की भाषा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप संस्कृत विषय के संवर्धन संरक्षण हेतु उल्लेख किया गया है। उनका ध्यान रखते हुए 30 अप्रैल गुरूवार को शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव द्वारा विधानसभा से घोषणा किया गया कि संस्कृत को अनिवार्य कर रहे हैं, जिनका लघु चलचित्र फेसबुक और व्हाट्सएप में बहुत प्रचारित हो रहा है, इसे देख और सुनकर प्रदेश भर के संस्कृत शिक्षकों में शासन की सौहार्द्र पूर्ण व्यवहार से काफी हर्ष व प्रसन्नता की लहर है। संस्कृत भारतीय ज्ञान परंपरा सभ्यता और संस्कार परक एक राष्ट्रभाषा है, जिनमें सनातन संस्कृति पूर्ण रूप से समाहित हैं। संघ के पदाधिकारियों द्वारा 10 अप्रैल को शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर घोषणा के धरातल पर क्रियान्वयन के लिए शीघ्रातिशीघ्र शासकीय श्वेत पत्र (आदेश) जारी करवाने हेतु निवेदन आवेदन दिया गया तथा शिक्षा मंत्री द्वारा संस्कृत अनिवार्य करने बोला भी गया, यह प्रदेश भर के संस्कृत गुरुजनों के लिए बहुत बड़ा पुरस्कार है।
पदाधिकारीयों ने आगे बताया कि इस पावन कार्य के लिए निरंतर प्रदेश के अनेक जिला शिक्षा अधिकारी, जिला कलेक्टर बेमेतरा दुर्ग रायपुर गरियाबंद महासमुंद बस्तर कांकेर विधायकगण, वित्तमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह, नेता प्रतिपक्ष डॉ चरण दास महंत, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, राज्यपाल रमेन डेका, संचालक लोक शिक्षण संचालनालय, मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन, सचिव स्कूल शिक्षा विभाग, संचालक राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, सचिव छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल, सचिव सहायक संचालक छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्या मण्डलम्, प्रदेश संयोजक व अध्यक्ष अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन कमल वर्मा, लोकसभा सदस्य बृजमोहन अग्रवाल, डॉ अतुल कोठारी राष्ट्रीय सचिव शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नई दिल्ली, आयुक्त राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ और विभिन्न सामाजिक संगठनों सहित 50 से भी अधिक आवेदन बारम्बार संस्कृत विषय को अनिवार्य करने और नवीन व्यावसायिक शिक्षा को सातवें विषय के रूप में रखने मांग पत्र एवं ज्ञापन सौंपा गया था।
25 अगस्त 2025 को शिक्षा मंत्री की समीक्षा बैठक में एससीईआरटी रायपुर को कक्षा छठवीं से लेकर कक्षा दसवीं तक संस्कृत विषय को अनिवार्य करने निर्देशित भी किया गया था, इसी तारतम्य में 07 सितंबर 2025 को सरयू पारिण भवन मठपुरेना में आयोजित विराट संस्कृत विद्वत सम्मेलन में उपस्थित मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह को भी मांग पत्र सौपा गया था, वहां पर अध्यक्ष ने अपने उद्बोधन में कहा कि संस्कृत संकल्प का विषय है विकल्प का नहीं, इस भाषा के साथ अन्याय नहीं होगा, एक तरफ पूरा विश्व संस्कृत भाषा के महत्व को अपना रही है, अपने देश के विद्यालय, महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालयों में संस्कृत भाषा को अनिवार्य शिक्षा कर रहे हैं तथा अनुच्छेद 351 आठवीं अनुसूची की भाषाओं के सम्मान के लिए बनाया गया है।
छत्तीसगढ़ संस्कृत शिक्षक संघ ने चलाया संस्कृत विषय बचाओ अभियान शासन के सौहार्द्र पूर्ण व्यवहार से प्रदेश भर के संस्कृत शिक्षकों की सपना साकार हो रही है।