शीतला मंदिर मटिया (बारगांव, बेरला) में 51 ज्योति प्रज्वलित
बेमेतरा 19 मार्च 2026 - हिंदू धर्म में नवरात्रि के पर्व का विशेष महत्व होता है। चैत्र माह में पड़ने वाली नवरात्रि को चैत्र नवरात्रि या वसंत नवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है। इस साल चैत्र नवरात्रि की शुरुआत गुरूवार 19 मार्च से प्राम्भ हो गई है, अष्टमी 26 मार्च और नवमीं 27 मार्च को होगा। इस नवरात्रि के मटिया (बारगांव, बेरला) के शीतला मंदिर में 51 ज्योति प्रज्वलित है।
नवरात्रि के दौरान मां भगवती के नौ रूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है और व्रत रखे जाते हैं। पंडित बोसेन्द्र पांडेय ने बताया कि इस पर्व में जौ या ज्वार का बहुत महत्व होता है। नवरात्रि के पहले दिन यानी घटस्थापना या कलश स्थापना पर घर और मंदिरों में जौ बोने का महत्व है। जौ के बिना नवरात्रि की पूजा अधूरी मानी जाती है।
अखंड ज्योति का महत्व
1.मान्यता है कि अखंड ज्योत जलाने से मां स्वयं दीपक में विराजमान होती है। ऐसे में मां का आशीर्वाद सदैव घर परिवार के सदस्यों पर बना रहता है।
2.अखंड ज्योत सिर्फ दीपक नहीं होता है बल्कि यह भक्ति का प्रकाश होता है ऐसे में नौ दिनों तक अखंड ज्योति प्रज्वलित करने से जीवन से अंधकार दूर होता है।
3.अखंड ज्योत जलाने से घर परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और मां दुर्गा की कृपा से सभी कार्य सिद्ध होते हैं। नवरात्रि में मनोकामनां पूर्ण करने के लिए भक्तों को अखंड ज्योत प्रज्वलित करनी चाहिए।
4.अखंड ज्योत जलाने से सभी प्रकार के वास्तु दोष भी दूर होते हैं। वास्तु दोष के दूर होने से भक्तों का भाग्योदय होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
जौ को माना गया है देवी अन्नपूर्णा का प्रतीक
हिंदू धर्म में जौ को देवी अन्नपूर्णा का प्रतीक माना गया है। पौराणिक मान्यता है कि जब ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की थी तब वनस्पतियों में जो सबसे पहले फसल विकसित हुई थी वह जौ या ज्वार थी। इसे पूर्ण फसल भी कहा जाता है। यही कारण है कि नवरात्रि के पहले दिन यानी घटस्थापना के साथ ही जौ बोये जाने का महत्व है। जौ बोने के साथ कलश स्थापना की जाती है। मान्यता है कि नवरात्रि पर जौ बोने से मां भगवती प्रसन्न होती हैं और इससे देवी दुर्गा के साथ ही, देवी अन्नपूर्णा और भगवान बह्मा का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके अलावा देवी-देवताओं के पूजन, हवन या कोई विशेष अनुष्ठान पर भी जौ अर्पित किए जाते हैं।