साजा की सरकारी जमीनों से अतिक्रमण हटाने प्रशासन ने सीमांकन कर की कार्यवाही की पहल

मामला नगर पंचायत साजा के सरकारी जमीनों में किए गए अतिक्रमण का 

गरीब v/s रसूखदारों पर कार्यवाही में हैं सभी की नजरें 

जल संसाधन विभाग के बांधा के बाद अब नहरों के सीमांकन की कार्यवाही 

सरकारी जमीनों से अतिक्रमण हटाने में प्रशासन पूरी तरह फैल - नगरवासी साजा 
प्रमोद गुप्ता/बेमेतरा 17 जनवरी 2026 - नगर पंचायत साजा की सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण हटाने के मामले में प्रशासन पूरी तरह फैल नजर आ रहा है, जिसका नतीजा शहर में आपसी द्वंद बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को वार्ड नंबर 14 में नहर का सीमांकन किया गया। भारी गहमागहमी के बीच महामाया मंदिर से 200 मीटर नहर का सीमांकन किया गया। 
ज्ञात हो कि वार्ड नंबर 14 में पार्षद निधि से काम कराने को लेकर पार्षद गोपाल वर्मा ने जगह चिन्हांकित की थी, जिस पर किसान मनीष वर्मा ने अपनी जमीन बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई थी, विवाद यही से शुरू हुआ।मामला तहसीलदार के पास भी पहुंचा, पटवारी ने उक्त जमीन को घास भूमि बताया, लेकिन स्पष्ट फैसला नहीं होने के चलते विवाद बढ़ गया। फैसला के कुछ दिन बाद मनीष वर्मा द्वारा उक्त जमीन पर जेसीबी चलवाने से माहौल फिर गर्म हुआ। 
     बीते दिनों मनीष वर्मा ने महामाया मंदिर के सामने सैगौन काटे जाने की शिकायत करते हुए एसडीएम को ज्ञापन दिया था। जिस पर फॉरेस्ट की टीम में मौके पर पहुंची, लेकिन स्पष्ट नहीं हो पाया कि पेड़ कब काटे गए हैं, इस बात से माहौल गर्म था। 
शुक्रवार को नहर नाली के सीमांकन के लिए राजस्व विभाग के पटवारी टीकम देवांगन, आर आई टंडन, जल संसाधन विभाग से अमीन मौका स्थल पर पहुंचकर जगह का सीमांकन करते हुए नहर की सीमा का निशान लगाया। विदित हो कि लंबे समय से नहर के सीमांकन को लेकर मांग उठती रही थी, लेकिन नहर पूरी तरह अतिक्रमण की चपेट में आ चुका है और नामोनिशान मिट चुका है। सीमांकन के बाद पटवारी ने पंचनामा करवाया। नहर के आगे का सीमांकन दो दिन बाद किए जाने का भरोसा दिया। आज नहर के सीमांकन को लेकर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा रही। अतिक्रमण के मामलों में प्रशासन की सुस्ती के चलते गांव-गांव में तनाव फैलने लगा है। 
साजा का सरकारी जलाशय (बांधा) भी पूरी तरह अतिक्रमण की भेंट चढ चुका है। मुख्यमंत्री तक शिकायत होने के बावजूद किसी भी विभाग ने इसे मुक्त करने में कोई पहल नहीं की, यदि समय रहते अतिक्रमण के मामलों को नहीं सुलझाया गया तो कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है। राजस्व विभाग न अतिक्रमण रोक पा रहा है ना कार्रवाई कर रहा है, जिसके चलते गांव से लेकर शहर तक स्थिति खराब हो रही है। सीमांकन के दौरान लाल शौर्यजीत सिंह, पार्षद कमल राजपूत, आशीष वर्मा, गोपाल वर्मा, प्रकाश सिंहा, अवधेश गोयल, राजा चौबे, मनीष वर्मा सहित भारी संख्या में नगरवासी उपस्थित थे। 

तहसीलदार ने शांत कराया मामला 
जेसीबी चलवाने से गर्म हुए माहौल स्थल पर तहसीलदार निरीक्षण करने पहुंचे थे, जहां जेसीबी चल रही थी, उसे तत्काल रुकवाया गया और मामला शांत किया गया। गुरुवार को मनीष वर्मा ने महामाया मंदिर के सामने सागौन पेड़ काटे जाने की शिकायत एसडीएम से की, जिस पर फॉरेस्ट की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन स्पष्ट नहीं हो पाया कि पेड़ कब काटे गए हैं। जिस स्थल की शिकायत की गई वह पार्षद गोपाल वर्मा के परिवार की हैं। शिकायत सही है या गलत यह तो जांच के बाद पता चलेगा। 

सरकारी जमीनों से अतिक्रमण हटाने में प्रशासन पूरी तरह फैल - नगरवासी साजा 
नगर पंचायत साजा की सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण हटाने के मामले में प्रशासन पूरी तरह फैल नजर आ रहा है, जिसका नतीजा शहर में आपसी द्वंद बढ़ता जा रहा है। नगर पंचायत साजा के नगरवासीयो द्वारा कहा जा रहा हैं कि प्रशासन शासकीय जमीनों पर से अतिक्रमण हटाने में पूरी तरह फैल नजर आ रही हैं। क्योंकि अब बात नगर के रसूखदारों व पूंजीपतियों की हैं, जिन पर कार्यवाही करने से प्रशानिक अधिकारी कर्मचारी अपने आप को बचाना चाह रहे हैं। नगरवासीयो ने कहा कि अगर यहां पर बात गरीब व कमजोर पर होती तो तत्काल कार्यवाही कर दिया जाता, मगर अभी यहां पर बात रसूखदारों व पूंजीपतियों की हैं, जिन पर कार्यवाही करने से प्रशानिक अधिकारी कर्मचारी लाचार व मजबूर नजर आ रहे हैं। इस अतिक्रमण पर अब सभी की नजरें बनीं हुई हैं, जो सिर्फ कार्यवाही की प्रतीक्षा करते नजर आ रही हैं। बहरहाल प्रशासन ने कदम उठाकर पहल तो की है, अब देखना यह हैं कि यह कार्यवाही कहा तक जाती हैं। 

बांधा के बाद अब नहरों का सीमांकन 
नगर पंचायत साजा में सरकारी जमीनों पर हुए अतिक्रमण को लेकर सोशल मीडिया व शिकायतों के बाद अब जाकर नगर पंचायत, राजस्व व जल संसाधन विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों की संयुक्त टीम द्वारा कार्यवाही करते हुए नहर का सीमांकन कार्य किया गया। जिससे नगर में माहौल गर्म रहा। इस नहर के सीमांकन के पूर्व ही बांधा का भी सीमांकन किया गया था, जो भी सीमांकन पश्चात चिन्हांकित के बाद अभी तक अधूरा है। अब सभी की नजरें अतिक्रमण की होने वाली कार्यवाही पर बनीं हुई हैं। नगरवासी अब देखना चाहते हैं कि क्या इस कार्यवाही का परिणाम सार्थक होगा। क्योंकि यहां पर बात अब गरीब व रसूखदारों के मध्य का हैं, जिस पर सभी की नजरें बनीं हुई हैं।