अवैध मुरम-मिट्टी तस्करी के लिए हॉटस्पॉट बना बेरला/भिम्भौरी तहसील क्षेत्र

अवैध मुरम-मिट्टी तस्करी के लिए हॉटस्पॉट बना बेरला/भिम्भौरी तहसील क्षेत्र  

रात के अंधेरे में हो रहा खनन व परिवहन का खेल 

अधिकारियों के सह पर चल रहा यह खनन व परिवहन का खेल 

ग्राम पंचायत क्षेत्रो में अवैध कार्यों के लिए पंचायत सचिव की सर्वप्रथम जिम्मेदारी को भी नकारा नहीं जा सकता 
प्रमोद गुप्ता/बेमेतरा/बेरला - राजधानी रायपुर से लगे बेमेतरा के सीमावर्ती नवीन तहसील भिम्भौरी एवं तहसील बेरला क्षेत्र में अवैधानिक रूप से मुरम और मिट्टी खनन व परिवहन का गम्भीर मामला सामने आ रहा है। जिसमे रात के अंधेरे में शासन-प्रशासन की कार्यवाही से बेखौफ मुरम-मिट्टी तस्कर धड़ल्ले से इस गैरकानूनी कार्य की तस्करी को अंजाम दे रहे है। इन दिनों स्थिति यह है कि इलाके के अनेकों गांवो में मुरम खनन व परिवहन के ताजा प्रमाण स्पष्ट रूप में देखने को मिल रहा है, वही इस अवैधानिक गतिविधियों से क्षेत्र के ग्रामीण लोग भयभीत व नाराज है। 
      फिलहाल रात होते ही मुरम-मिट्टी खनन के खुफिया स्पॉट पर चैन माउंटेन, जेसीबी, हाइवा व अन्य साधनों का जमावड़ा देखने को मिलता है, जिससे शासन-प्रशासन को लाखों रुपये का नुकसान के साथ पर्यावरण व समतल भूमि का खुलेआम दोहन हो रहा है। 
      जबकि इस गतिविधि से ग्रामीण क्षेत्र की सड़क व प्राकृतिक ताने-बाने को काफी क्षति पहुच रही है। 
     बताया जा रहा है कि भिम्भौरी व बेरला क्षेत्र में मुरम तस्करी का यह कारोबार जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी में खुलेआम हो रहा है, जिसमे जवाबदेही के लिए प्रशासन द्वारा महज औपचारिक कार्यवाही की भूमिका अदा किया जा रहा है। जिसके कारण मुरम-मिट्टी माफियाओं के हौसले जमकर बुलन्द है। 
 दरअसल नवीन तहसील भिम्भौरी एवं तहसील बेरला क्षेत्र में दर्जनों मुरम-मिट्टी खननकर्ता एवं परिवहनकर्ता सक्रिय है, जो क्षेत्र की खनिज संपदा को अवैधानिक रूप से निकटवर्ती राजधानी रायपुर क्षेत्र सहित दीगर जिलों में खपा रहे है। 
    लिहाजा ग्राम गुधेली, चंडी, नेवनारा, घटिया, मौलीभाठा, हसदा, खमतराई, ढाबा, कुम्ही, गोड़गिरी, कोहड़िया, पिरदा, उफरा, बोरसी, बेरलाकला, सोढ, भाटासोरही, कुम्ही, टकसिवा, तारालिम, बहेरा, कुसमी, सरदा सहित अन्य कई गांवों खनन के लिए प्रसिद्ध हैं। जो कि इन ग्रामों में अवैध खनन के कारण जगह-जगह बेतरतीब व बड़े बड़े गड्ढे देखे जा रहे है। जिसके प्रत्यक्ष प्रमाण इन गांवों में घूमकर देखने पर ही पता चल जाएगा।
     उल्लेखनीय है कि यह सरहदी भिम्भौरी क्षेत्र जिला एवं विकासखण्ड मुख्यालय से सुदूर होने के कारण प्रशासनिक पकड़ कमजोर है। वही प्रदेश की राजधानी रायपुर व इन इलाकों के बीच महज खारुन नदी प्रवाहित होता है। जिससे राजधानी के करीब दीगर जिले का सीमावर्ती इलाका होने का फायदा यह है कि क्षेत्र में अवैध एवं गैरकानूनी कार्य के लिए हॉटस्पॉट बनता जा रहा है। 
     जिस पर स्थानीय स्तर से लेकर तहसील, विकासखण्ड एवं जिला स्तर के विभागीय अधिकारियों को गम्भीरता से ध्यान देने की जरूरत है। 
  ग्रामों में हो रही इस अवैधानिक कार्यों के लिए जिम्मेदार सबसे पहले ग्राम पंचायत के सचिव हैं, जिनके ग्राम पंचायत क्षेत्र में यह कार्य होता हैं। उसके बाद पटवारी, तहसीलदार, एसडीएम और खनिज विभाग की जिम्मेदारी बनती हैं। अगर इनमें से किसी एक के द्वारा भी ईमानदारी से कार्य किया जाए तो यह कार्य किया जाना असंभव होगा। 

इस संबंध में खनिज विभाग के अधिकारी से संपर्क करने पर उनके द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया, जिससे उनका पक्ष नहीं मिल पाया। 

"जानकारी व शिकायत मिलने पर तत्काल कार्यवाही किया जाता हैं। राजस्व की टीम कार्यवाही के लिए हमेशा तैयार हैं। अभी विगत दिनों कई गाड़ियों व चैन माउंटेन की जप्त करने की कार्यवाही की गई थी। 
--- दीप्ति वर्मा, एसडीएम बेरला"