श्रीमद भागवत कथा हमें भक्ति, ज्ञान प्रेम प्रदान करती है, जिसका श्रवण कर मिलता हैं जीवन में सुखी व अंत में मोक्ष - पंडित प्रदीप चौबे

श्रीमद भागवत कथा हमें भक्ति, ज्ञान प्रेम प्रदान करती है, जिसका श्रवण कर मिलता हैं जीवन में सुखी व अंत में मोक्ष - पंडित प्रदीप चौबे 

नपं मारो मे दीवान परिवार द्वारा श्री मद भागवत महापुराण कथा का आयोजन 
प्रमोद गुप्ता/बेमतरा 18 दिसम्बर 2025 - नगर पंचायत मारो मे मोहधर मणीशंकर दीवान के माता स्व श्रीमती रत्ना दीवान के पुण्य तिथि में उनके स्मृति में चल रहे श्री मद भागवत महापुराण में कथावाचक तिल्दा नेवरा वाले पंडित प्रदीप चौबे ने कहा कि श्रीमद भागवत की कथा हमें भक्ति ज्ञान और भगवान के प्रति प्रेम प्रदान करती है, जिसे श्रवण कर जीवन को सुखी बना कर अंत में श्री भगवान को पाया जा सकता है। यह भागवत महापुराण सात अक्षर का है, इसे सातों दिवस श्रवण करना चाहिए। यह अर्थ धर्म सहित सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हुए अंत में मोक्ष भी प्रदान करता है। 
पंडित श्री चौबे ने कहा कि भगवान सभी प्राणियों में समान रूप से विद्यमान है, इसलिए किसी भी प्राणी का तिरस्कार या उनका अपमान नहीं करना चाहिए। इस संसार में सबसे पहले जो पुरुष आया उनका नाम महाराज मनु है और जो पहले स्त्री आयी उनका नाम शतरूपा है, जो ब्रम्हा जी के द्वारा प्रकट हुए और उन्हीं महाराज मनु के द्वारा समस्त मानव समाज की सृष्टि हुई। मनु के संतान होने के कारण ही हमें मनुष्य कहा जाता है, इसलिए हम सब मानव एक समान है, हम सब को एक साथ मिलकर बड़े आनन्द के भगवान के इस संसार में प्रेम से जीना चाहिए। 
      भागवत की कथा महाभारत से प्रारंभ होती है। कौरवों और पांडवों का प्रसंग सुनाते हुए पंडित प्रदीप चौबे ने कहा कि जिस घर का मुखिया अत्यधिक स्वार्थी हो वहा महाभारत हो ही जाता है। परिवार के मुखिया को त्यागी होना चाहिए, जहा त्याग है वहां राम कथा है और जहा स्वार्थ है अत्यधिक महत्वाकांक्षी हैं वहा महाभारत है। 
        आगे कथा में श्री वराह अवतार की कथा का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि हिरण्याक्ष लोभ का प्रतीक है, जो पराया धन को अपने शक्ति के बल से हड़पना चाहता है, वहीं हिरण्याक्ष है। श्री वराह अवतार की कथा श्रवण करने से लोभ का नाश होता है, शिव सति प्रसंग में भी राजा दक्ष को अहंकार का प्रतीक बताया। जब साधारण जीव को अयोग्य व्यक्ति को बहुत बड़ा पद मिल जाता हैं, तो वह शिव के अस्तित्व को भी नकारने लग जाता है। राजा दक्ष जीव होकर शिव का अपमान किया, जिसमें उसका पतन और मैं मैं कहने वाला बकरे का सिर वाला हो गया। 
     यह श्रीमद भागवत कथा कथा 15 दिसंबर से प्रारंभ हुई है जो 21दिसंबर तक चलेगी।