मटिया (बारगांव) में गौरा-गौरी की पूजा-अर्चना कर निकाली गई भव्य शोभायात्रा

मटिया (बारगांव) में गौरा-गौरी की पूजा-अर्चना कर निकाली गई भव्य शोभायात्रा

रात में निकली गौरा की बारात, झूमे श्रद्धालु
प्रमोद गुप्ता/बेमेतरा/बेरला/बारगांव 22 अक्टूबर 2025 - छत्तीसगढ़ में सदियों से दिवाली की रात गौरा- गौरी उत्सव मनाने की परंपरा चली आ रही है। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी मटिया-बारगांव में मंगलवार की देर रात गौरी गौरा का विवाह उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर गौरा (शिवजी) की बारात बाजे-गाजे के साथ आतिशबाजी करते हुए निकाली गई। रातभर गौरा चौरा में विवाह की रस्म निभाने के बाद बुधवार की सुबह गौरा-गौरी की शोभायात्रा निकाल कर विदाई दी गई।
    गोंड़ समाज द्वारा गौरा-गौरी विवाह के साथ ही मूर्ति विसर्जन हेतु शोभायात्रा निकाली गई। जिसमें आदिवासी समाज के साथ-साथ अन्य समाज के भक्त भी भगवान के विवाह के साक्षी बने। ब्रमबाबा मोहल्ला में विगत कई वर्षों से गौरा-गौरी लोक संस्कृति का जीवंत उदाहरण है। आदिवासी समाज द्वारा धनतेरस के दिन फूलरस्म व तालाब से मिटटी लाकर अलग अलग दो स्थानों में भगवान गौरा व माता गौरी की हस्त प्रतिमा भारत साहू व मनोहर पाटिल द्वारा बनाया गया और दिवाली की रात बाजे गाजे के साथ आतिशबाजी करते हुए भगवान गौरा की बारात यह एक जीती-जागती परम्परा निकाल माता गौरी के घर ले जाया गया, जहां गौरी-गौरा विवाह कराया गया। लोग पूरे रात कार्यक्रम कर सुवा नृत्य प्रस्तुत किये। बुधवार को बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मंजीरा व मादर की थाप पर गौरा-गौरी प्रतिमा का शोभायात्रा निकाल कर विसर्जन किया गया। समाज के लोगो ने पारम्परिक वेशभूषा सहित वाद्य यंत्रो सहित मांदर बजाते हुए थिरकते नजर आए। भाईचारे को बरकरार रखते हुए इस दिन आदिवासी समाज के साथ-साथ अन्य समाज के लोग पूरे हर्षोल्लास से इस यात्रा में शामिल हुए। शोभायात्रा में सरोज ध्रुव, रामबाई, गजरा ध्रुव, मोंगरा, अर्चना, तीजन ध्रुव, त्रिवेणी ध्रुव, दुलारी, बेबी ध्रुव, विमला ध्रुव, अमृत ध्रुव, मिलवंतीन निषाद, राधा ध्रुव, मनीता ध्रुव, मनोहर पाटिल, भारत साहू, तिहारु निषाद, सनत पटेल, सुशील ध्रुव, गिरवर ध्रुव, मुकेश ध्रुव, चुम्मन ध्रुव सहित अन्य समाज के लोग भी शामिल हुए।

सोटा खाने व पीठ से पार कराने से सभी कष्ट हो जाते है दूर - भारत साहू ने बताया कि सोटा अपने हाथ में मारने व जिनके द्वारा गौरा-गौरी अपने सर पर रखे हुए होते हैं उनके कदमों के नीचे लेटने की स्थानीय परंपरा है। लोगों का मानना हैं कि जो लोग यह करते है उसके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं, इसीलिए वहां पर सोटा से मार खाने की लोगों में उत्सुकता रहती है। हालांकि कुछ लोग इसे अंधविश्वास कहते हैं, लेकिन यह परंपरा वर्षों से अपने पुराने रूप में ही चली आ रही है।