मटिया (बारगांव) महाअष्टमी पर पूजा पंडाल व शीतला मंदिर में हवन पूजन
शीतला मंदिर मटिया में 151 कन्याओं को कराया गया भोज
प्रमोद गुप्ता/बेमेतरा/बेरला 30 सितंबर 2025 - नवरात्र के अष्टमी तिथि पर मंगलवार को मटिया (बारगांव, बेरला) में मां दुर्गा की आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा विधि विधान से की गई। वहीं मंगलवार को सभी दुर्गा पंडालों में हवन विधिविधान से की गई। पंडित ने मंत्रोच्चार के साथ हवन की शुरूआत की। इसके बाद पूजा अर्चना की गई। वहीं कुछ जगहों पर हवन कार्यक्रम देर शाम तक चला। पंडित के मंत्रोच्चार के साथ श्रद्घालु आहुति देते रहे। वहीं शीतला मंदिर मटिया व उपासक द्वारा घरों में कन्या भोज भी कराया गया।
पंडित बोसेन्द्र पांडेय ने बताया कि नवरात्रि की अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन किया जाना चाहिए, जिसे कंजक पूजन भी कहा जाता है। कन्या पूजा का विशेष महत्व होता है। शारदीय नवरात्रि की महाअष्टमी 30 सितंबर और महानवमी 1 अक्टूबर को है। कन्या पूजन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि देवी की शक्ति, स्त्री सम्मान और आस्था का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि नवरात्रि व्रत बिना कन्या पूजन अधूरा रहता है।
हवन से जीवन की बाधाएं होती है दूर - बोसेन्द्र
ज्योतिषचार्य बोसेन्द्र पांडेय ने बताया कि हवन का धार्मिक महत्व केवल अग्नि में आहुति देना भर नहीं है, इसे सद्भाव, श्रद्धा और शुद्ध विचारों के साथ करना आवश्यक है। हवन के दौरान अज्ञानता, डर और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है। घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा फैलती है, मन को शांति मिलती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
कन्या पूजन से घर में आती है सुख, शांति और समृद्धि - उपासक प्रतिभा वर्मा ने कन्या पूजन के दौरान 3 से 10 वर्ष की 9 कन्याओं और 1 बालक को देवी दुर्गा का स्वरूप मानकर घर बुलाया। उन सभी कन्याओं के पैर धोए, उन्हें तिलक लगाया और फिर हलवा-पूड़ी व भोजन कराए। इसके बाद उन्हें उपहार और दक्षिणा दी गई और अंत में उनका आशीर्वाद लिया। उनका कहना है कि कन्या पूजन से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है, साथ ही मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस पूजन से दरिद्रता दूर होने, धन लाभ, आरोग्य प्राप्ति, ज्ञान-विजय, शत्रुओं का नाश और समस्त विघ्नों से मुक्ति जैसे लाभ मिलते हैं।
मां सिद्धिदात्री की आज होगी पूजा - नवरात्र के नौवें और अंतिम दिन 1 अक्टूबर बुधवार को मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाएगी। मां सिद्धिदात्री देवी दुर्गा का नौवां रूप हैं और उनकी पूजा करने से भक्तों को सभी सिद्धियाँ और निधियाँ प्राप्त होती हैं, जिससे जीवन में पूर्णता और सफलता मिलती है। 'सिद्धि' का अर्थ अलौकिक शक्ति और 'दात्री' का अर्थ देने वाली है। इस प्रकार, सिद्धिदात्री का अर्थ है सभी सिद्धियों को देने वाली देवी। इनकी पूजा से साधक को आठों सिद्धियाँ और 9 प्रकार की निधियाँ मिलती हैं। मां सिद्धिदात्री को गहरा हरा रंग प्रिय है, जो शुभता और समृद्धि का प्रतीक है। इनकी कृपा से भक्त के जीवन में सफलता और पूर्णता आती है।