भाजपा नहीं चाहती कि गरीबों के बच्चे अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में उत्कृष्ट शिक्षा हासिल करें, यही कारण है कि इन स्कूलों को धीरे-धीरे बंद करने का किया जा रहा षड्यंत्र - जिलाध्यक्ष आशीष छाबड़ा

भाजपा नहीं चाहती कि गरीबों के बच्चे अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में उत्कृष्ट शिक्षा हासिल करें, यही कारण है कि इन स्कूलों को धीरे-धीरे बंद करने का किया जा रहा षड्यंत्र - जिलाध्यक्ष आशीष छाबड़ा 

जिला कांग्रेस कमेटी ने स्वामी आत्मानंद स्मृति संविदा शिक्षक संघ के हड़ताल को दिया समर्थन 
प्रमोद गुप्ता/बेमेतरा - जिला कांग्रेस कमेटी बेमेतरा ने छत्तीसगढ़ व्यापी स्वामी आत्मानंद स्मृति संविदा शिक्षक संघ के द्वारा किए जा रहे हड़ताल को अपना समर्थन दिया है। जिला कांग्रेस कमेटी बेमेतरा अध्यक्ष आशीष छाबड़ा ने कहा कि जब भाजपा सरकार सत्तासीन हुई तो शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने स्वामी आत्मानंद स्मृति विद्यालयों के प्रबंध समिति जो कलेक्टर के अध्यक्षता में हुआ करती थी को भंग करते हुए उसे शिक्षा विभाग में मिलाने का निर्णय लिया और जब यह निर्णय लिया गया है तो उन्हें शासकीय सेवकों के समान सुविधा भी दी जानी चाहिए। पूर्व में जब कांग्रेस सरकार ने इन स्कूलों को प्रारंभ किया तो इन स्कूलों के शिक्षकों के वेतन भत्ते आदि सभी चीजों का इंतजाम प्रबंधन समिति के माध्यम से किया था। प्रदेश में कांग्रेस सरकार के रहते इन स्कूल में कार्यरत शिक्षक एवं कर्मचारियों को कभी कोई शिकायत नहीं हुई, किंतु जब से भाजपा सत्ता में आई है तब से इन स्कूलों को बंद करने का षड्यंत्र किया जा रहा है। इन स्कूलों को धनराशि उपलब्ध नहीं कराई जा रही है, ना ही शिक्षा विभाग के माध्यम से इन्हें किसी प्रकार का आर्थिक सहयोग किया जा रहा है। भाजपा नहीं चाहती कि गरीबों के बच्चे अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में उत्कृष्ट शिक्षा हासिल करें। यही कारण है कि इन स्कूलों को धीरे-धीरे बंद करने का एक षड्यंत्र किया जा रहा है। साथ ही साथ यहां के कर्मचारी एवं शिक्षकों को स्कूल त्यागने के लिए विवश किया जा रहा है। जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक आशीष छाबड़ा ने स्वामी आत्मानंद स्मृति संविदा शिक्षक संघ द्वारा किए जा रहे दो सूत्रीय मांगों का समर्थन किया है। जिसमें उन्होंने नियमित वेतन एवं भत्तो के भुगतान की बात कही है। साथ ही साथ उन्होंने कहा कि जब शिक्षा विभाग में इन स्कूलों का सिविलियन कर लिया गया है तो शिक्षकों का भी संविलियन किया जाना चाहिए।