किसानों से सहयोग की अपील
फसल अवशेष जलाने वालों पर लगेगा अर्थदंड/जुर्माना
प्रमोद गुप्ता/बेमेतरा 27 अप्रैल 2025 - नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के निर्देशानुसार अब खेतों में फसल अवशेष जलाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। पर्यावरण को हो रहे नुकसान को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। उप संचालक कृषि मोरध्वज डडसेना ने जानकारी दी कि आदेश का उल्लंघन करने पर कृषकों से उनके खेत के रकबे के अनुसार दंड वसूला जाएगा।
अर्थदंड/जुर्माना - उप संचालक कृषि मोरध्वज डडसेना ने बताया कि दो एकड़ तक के किसानों पर 2500 रुपए, दो से पांच एकड़ वाले किसानों पर 5000 रुपए तथा पांच एकड़ से अधिक रकबा वाले किसानों पर 15000 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा।
फसल अवशेष के लाभ व हानि - उप संचालक कृषि मोरध्वज डडसेना ने बताया कि फसल अवशेष जलाने से खेत की सतह पर मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव, मित्र कीटों के अंडे तथा भूमि में पाई जाने वाली ह्यूमस नष्ट हो जाती है, जिससे भूमि की उर्वरता एवं आगामी फसल उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ता है। इसके विपरीत, फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन जैसे कम्पोस्टिंग अथवा जीरो टिलेज विधि से अवशेषों को खेत में ही सड़ने देना, मृदा की गुणवत्ता को बनाए रखने में सहायक हो सकता है।
अवशेष जलाने के हानिकारक प्रभाव - उप संचालक कृषि एमडी डडसेना ने यह भी बताया कि एक टन पैरा जलाने से भारी मात्रा में प्रदूषक गैसें जैसे कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड उत्सर्जित होती हैं और करीब 199 किलोग्राम राख का उत्पादन होता है, जो पर्यावरण के लिए बेहद हानिकारक है। साथ ही प्रति टन जलने वाले धान के पैरा से मृदा में 5.5 किलोग्राम सल्फर का नुकसान होता है।
अपील - कलेक्टर रणबीर शर्मा ने सभी सरपंचों से अपील की है कि वे अपने-अपने गांवों में किसानों को फसल अवशेष जलाने से रोकें और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करें।