श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ को केवल बाहरी अनुष्ठान नहीं, बल्कि माना जाता हैं आंतरिक शुद्धि की प्रक्रिया - श्रद्धा दीदी

भगवान गिरिराज को लगाया छप्पन भोग, श्रद्धालुओं की रही भीड़ 

आज होगी श्रीकृष्ण रूकमणी विवाह, लोगों को लुभा रही वृंदावन की झांकी 
प्रमोद गुप्ता/बेमेतरा 02 फरवरी 2026 - बेमेतरा जिले के बेरला ब्लाक के ग्राम बारगांव में आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह के छठवें दिन सोमवार को कथावाचक वृंदावन से दीक्षा प्राप्त पूज्या श्रद्धा दीदी ने कहा कि श्रीमद् भागवत के 'भ' का अर्थ भक्ति, 'ग' का ज्ञान और 'व' का वैराग्य है। इन तीनों के द्वारा 'त' यानी तरना (जीवन को विकारों से पार लगाना) संभव होता है। भागवत ज्ञान यज्ञ को केवल बाहरी अनुष्ठान नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धि की प्रक्रिया माना जाता है, जहाँ दिव्य कथाओं के माध्यम से मानव चेतना को ईश्वर से जोड़ा जाता है। 
      छठवें दिन सोमवार को कथावाचक पूज्या श्रद्धा दीदी ने भगवान गिरिराज के महत्व के बारे में वर्णन करते हुए बताया कि श्री गोवर्धन अपने कई अर्थ लिए दिव्य पर्वत हैं। उन्होंने बृजमंडल में स्थिति भगवान गिरिराज के दर्शनों के लिए उमड़ती विशाल भीड़ की चर्चा करते हुए कहा कि आज गोवर्धन जी भक्तों की सभी मनोकामनायें पूरी करते हैं। 
गाय के गोबर से निर्मित वेदमंत्रों से प्रतिष्ठित गिरिराज जी की प्रतिमा को 56 भोग का प्रसाद चढ़ाया गया, जो बाद में भक्तों को वितरित किया गया। वहीं 3 फरवरी को श्री कृष्ण रुक्मणी विवाह होगा। 
कथा श्रवण में उपस्कथिति - श्रीमद् भागवत कथा बारगांव में कथा का श्रवण करने बेरला जनपद पंचायत उपाध्यक्ष शुभम वर्मा, जनपद सदस्य हीरा देवी वर्मा, पंच बिरेन्द्र साहू, बल्लू साहू, लेखु साहू, गिरवर मानिकपुरी, रमेश साहू, द्रोपती देवांगन, ललिता यादव, राजनंदिनी साहू, उर्मिला रावत, रामकुमार देवांगन, संतोष वर्मा सहित ग्रामवासी पहुंचे।

श्रीमद भागवत कथा साक्षात श्रीकृष्ण है और जो श्रीकृष्ण है, वही साक्षात भागवत कथा है - श्रद्धा दीदी 
पूज्या श्रद्धा दीदी ने कहा कि भागवत कथा ऐसी कथा है, जिनके श्रवण मात्र से बड़े से बड़े पापी का भी उद्धार हो जाता है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा ही साक्षात कृष्ण है और जो कृष्ण है, वही साक्षात भागवत है। भागवत कथा भक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। भागवत कथा एक कल्पवृक्ष की भांति है, जिससे व्यक्ति को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। उन्होंने लोगों से भक्ति मार्ग से जुड़ने और सत्कर्म करने को कहा। कथा श्रवण करने से मनुष्य में धार्मिक आस्था जागृत होती है। दुर्गुणों की बजाय सद्‌गुणों के द्वार खुलते हैं। यज्ञ से देवता प्रसन्न होकर मनवांछित फल प्रदान करते हैं। 
       उन्होंने बताया कि भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति भव सागर से पार हो जाता है। श्रीमद भागवत से जीव में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के भाव उत्पन्न होते हैं। इसके श्रवण मात्र से व्यक्ति के पाप पुण्य में बदल जाते हैं। विचारों में बदलाव होने पर व्यक्ति के आचरण में भी स्वयं बदलाव हो जाता है।