2025-26 में नई दिशा - जिलें में PMGSY की फेस-4 की शुरुआत
प्रमोद गुप्ता/बेमेतरा 7 नवंबर 2025 - बेमेतरा जिले का ग्रामीण जीवन आज एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। कभी कच्ची पगडंडियों और दुर्गम रास्तों की वजह से विकास से दूर रह जाने वाले गांव आज पक्की सड़कों के सहारे नई दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) ने यहाँ की जीवनशैली, अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने में ऐतिहासिक बदलाव लाया है।
वर्ष 2011-12 में जब अविभाजित दुर्ग जिले के अंतर्गत बेमेतरा में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की शुरुआत हुई, तब ग्रामीणों ने अपने गांव को मुख्य मार्गों से जुड़ने की एक आशा देखी।
लेकिन असली रफ्तार 2012 में जिले के गठन के बाद आई, जब योजनाओं को तेज गति मिली और कार्य ज़मीनी स्तर पर दिखने लगे। जिले के चारों विकासखण्डों बेमेतरा, साजा, बेरला और नवागढ़ में सड़क क्रांति का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है।
स्वीकृत सड़कें - 149
पूर्ण सड़कें - 149 (100% उपलब्धि)
कुल निर्मित लंबाई - 615.96 किलोमीटर
हर सड़क न सिर्फ एक मार्ग है बल्कि विकास का पुल है - जो गांवों को शहरों, संसाधनों, रोजगार और अवसरों से जोड़ता है।
2025-26 में नई दिशा - फेस-4 की शुरुआत
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना बेमेतरा के नवपदस्थ कार्यपालन अभियंता मुकेश सागरकर, एसडीओ अमर सिंह पैकरा, एसडीओ ज्योति दीवान ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष 2025-26 में PMGSY फेस-4 के तहत 02 नई सड़कों की DPR तैयार की जा चुकी है। इनका लक्ष्य है जिले के सभी SC, ST बहुल ग्रामों को पक्की सड़क जोड़ना। यह सिर्फ सुविधा का विस्तार नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की एक बड़ी पहल है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में सड़क निर्माण की गति तेज हुई है।
उनकी प्राथमिकता “ग्रामीण भारत का तेज, सुरक्षित और जुड़ा हुआ ढांचा” का सीधा लाभ बेमेतरा को मिला है। आज जिले के अधिकांश गांव मुख्य सड़कों से जुड़े हैं, जिससे बच्चों तक शिक्षा, मरीजों तक स्वास्थ्य सुविधाएँ, किसानों तक मंडी और बाजार, युवाओं तक नौकरी व रोजगार के अवसर सुगमता से पहुँच रहे हैं।
ग्रामीण जीवन में सकारात्मक बदलाव - पक्की सड़कों ने गाँव के हर वर्ग को छुआ हैं। किसानों को फसल बेचने में सहूलियत, ट्रैक्टर, ट्रक और गाड़ियों की आसान आवाजाही ने लागत घटाई और लाभ बढ़ाया।
बच्चों की पढ़ाई आसान, स्कूल अब दूर नहीं लगते, परिवहन साधन सुगम हुए।
स्वास्थ्य सेवाओं तक समय पर पहुँच - एम्बुलेंस और स्वास्थ्य दल अब तुरंत गाँव तक पहुँच जाते हैं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तेजी - नए व्यापार, बाजार और छोटे उद्योग गांवों तक पहुँचे।
गाँव से निकलती एक नई कहानी - अब बेमेतरा का हर गाँव विकास की आवाज सुन रहा है। सड़कों पर चलते वाहनों की आवाज, कदमों से भरी पगडंडियाँ और उम्मीदों से भरा हर चेहरा।
पक्की सड़कें सिर्फ कंक्रीट का स्ट्रक्चर नहीं, बल्कि गांवों की प्रगति, आत्मनिर्भरता और उज्ज्वल भविष्य की कहानी हैं।